NDA की बैठक का बहिष्कार कर विधानसभा के पिछले गेट से निकले मंत्री मुकेश सहनी

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पटना : विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पशुपालन एवं मतस्य मंत्री मुकेश सहनी ने सोमवार को एनडीए की बैठक का बहिष्कार कर दिया। बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में हुई मीटिंग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद मौजूद रहे। एनडीए के घटक दल में शामिल ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी भी थे। सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुई बैठक में मुकेश सहनी को छोड़कर सभी सहयोगी पार्टियों के नेता मौजूद रहे। सहनी विधानसभा के पीछे की गेट से बाहर निकल गए। वह उत्तर प्रदेश में फूलन देवी की मूर्ति नहीं लगाने देने पर नाराज बताए जा रहे हैं।

बैठक का बहिष्कार करने के बाद मंत्री सहनी ने कहा- “प्रधानमंत्री की सोच है सबका साथ, सबका विकास, लेकिन वह यूपी में नहीं दिखा। योगी जी ने गलत किया। इस वजह से एनडीए की बैठक का बहिष्कार कर रहा हूं। मुकेश सहनी ने कहा कि हम सरकार में है, लेकिन हमारी बात नहीं सुनी जा रही है। सहनी ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार चल रही है, लेकिन कुछ दिनों से अहसास नहीं हो रहा कि बिहार में चार पार्टी की सरकार है। लगता है कि केवल बीजेपी और जदयू की है.यहां एनडीए की सरकार है ऐसा लगता नहीं है। मुकेश सहनी ने कहा कि यहां मांझी जी की सरकार में बेहतर जगह होनी चाहिए, जो नहीं है। सहनी ने योगी आदित्यनाथ की सरकार के व्यवहार से आहत होते हुए कहा कि सारा भारत हमारा है। हम 165 सीट पर यूपी में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।”

एनडीए की मीटिंग

दरअसल मुकेश सहनी यूपी के 18 जिलों में पूर्व सांसद फूलन देवी की प्रतिमा लगवाने का फैसला किया था। फूलन देवी की 20वीं पुण्यतिथि पर कई जगहों पर प्रतिमा लगाने की तैयारी थी, लेकिन पुलिस ने माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रतिमाओं को जब्त कर लिया है। जिससे नाराज मुकेश सहनी ने अपना भड़ास एनडीए की मीटिंग में नहीं शामिल होकर निकला है।

बता दें कि बिहार में एनडीए को कुल 125 सीटें मिली हैं। इसमें बीजेपी को 74, जेडीयू को 43, वीआईपी को 4 और हम को 4 सीटें मिली हैं। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को 122 सीटों की जरूरत है। बीजेपी और जेडीयू की सीटें मिला दें तो 117 सीटें होती हैं। ऐसे में दोनों बड़े दल वीआईपी और हम को इग्नोर कर नहीं चल सकते हैं। क्योंकि सत्ता की चाभी इन्हीं दोनों के पास है।

अजय झा

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