कोरोना काल में गरीबों के दर्द को दिखाता “खइला बिना रोवे बबुआ”

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हाल ही में बंधु इंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत एल्बम “खईला बिना रोवे बबुआ” को दर्शकों और श्रोताओं के द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। एल्बम के लॉन्च होते ही हर किसी की जुबान पर ये गीत गुनगुनाया जा रहा है। प्रभात प्यारे और अविनाश बंधु द्वारा लिखे दर्द भरे गीत को अविनाश बंधु ने अपनी आवाज दी है। कोरोना काल में जबकि एक ओर अस्पतालों में ठसमठस भीड़ लगी है, हर दिन हजारों लोगों की जान जा रही है। लोगों की जान बचाने के लिए सरकार को लॉकडाउन लगाना पड़ रहा है। लोगों के रोजगार खत्म हो गए हैं, व्यवसाय ठप हैं, आमदनी का कोई साधन नहीं है। ऐसे में निम्न वर्ग की हालत बेहद दयनीय है। उन्हें खाने के लाले पड़े हैं, बच्चे भूखे हैं और शहर में कोई मदद करने वाला नहीं है। एक निम्न वर्गीय व्यक्ति अपने परिवार, अपने बच्चों के लिए किस प्रकार परेशान है,इस दर्द को गायक अविनाश बंधु ने बेहतरीन तरीके से दर्शाया है। एल्बम में दिखाया गया है कि किस प्रकार कोरोना की वजह से सामाजिक रिश्ते खत्म हो गए हैं, कोई किसी को पहचानता नहीं है। कोई मदद करने को तैयार नहीं है। वीडियो के अंत में अविनाश बंधु ने एक काफी महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि लाखों-करोड़ों मंदिरों और मस्जिदों में दान देकर किसी पत्थर पर नाम लिखाने से बेहतर है कि संकट की इस घड़ी में गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें और उनके दिल पर अपना नाम लिखाएं।

अजय झा

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