ममता बनर्जी खुद तो हारी लेकिन टीएमसी ने बंगाल में लगाई जीत की हैट्रिक

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तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक लगा दी है। वहीं बीजेपी उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाई जबकि कांग्रेस और लेफ्ट का पत्ता साफ हो गया है। इनका खाता तक नहीं खुला है। बता दें कि आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में लेफ्ट फ्रंट का एक भी नुमाइंदा नहीं पहुंच पाया है। यह वही फ्रंट है, जिसने तकरीबन साढ़े तीन दशक तक प्रदेश पर राज किया था। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 44 और लेफ्ट फ्रंट ने 26 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। साल 2011 के चुनाव में जब लेफ्ट फ्रंट के लंबे शासनकाल का अंत हुआ था, तब भी कांग्रेस 42 सीटें जीतने में सफल रही थी।

इस बार 2021 में बंगाल की जिन 292 सीटों पर मतगणना हुई, उनमें से 213 सीटें टीएमसी ने जीतीं। बंगाल के नतीजों से साफ हो गया है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में खेला कर दिया है। हालांकि, नंदीग्राम में ममता का हारना खीर में नमक जैसा रहा। वहीं बंगाल में अब तक अपनी सियासी जमीन तलाशती रही बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली। राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी से एक और एक निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव जीत विधानसभा पहुंचने में सफल रहा लेकिन कांग्रेस और वाम दलों का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका।
बंगाल चुनाव में दीदी की जीत के ये है मायने –
बंगाल चुनाव में भाजपा ममता सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण, घुसपैठ को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगा रही थी। इनके जरिए भाजपा ध्रुवीकरण की कोशिश में थी। काफी हद तक बीजेपी इसमें सफल भी दिखी, लेकिन इसके मुकाबले ममता बंगाली गौरव और संस्कृति की बात बार-बार कर रही थीं। उनकी चुनावी रणनीति यह थी कि वे बंगाल के लोगों को समझा रही थीं कि अगर वे चुनाव हारीं तो बंगाल के बाहर के लोग राज्य को चलाएंगे। हिंदी भाषी बहुल और उत्तर बंगाल में यह भले ही कम चला हो, लेकिन दक्षिण बंगाल और ग्रामीण इलाकों में यह मुद्दा चला और इसके सहारे ममता ने बढ़त बनाई।

बता दें कि बंगाल ने 1950 से लगातार 17 सालों तक कांग्रेस को सत्ता सौंपी, लेकिन जब राज्य को सियासी उठापटक का सामना करना पड़ा तो 1977 में उसने वामदलों को चुन लिया। इसके बाद बंगाल ने लेफ्ट को एक या दो नहीं, पूरे सात विधानसभा चुनाव जिताए। लेफ्ट ने CPM की अगुआई में भारी बहुमत के साथ पूरे 34 साल राज किया। लेफ्ट का दौर खत्म हुआ तो ममता की तृणमूल को सत्ता मिली और वे पिछले दस साल से आरामदायक बहुमत के साथ बंगाल पर राज कर रही हैं। इस बार फिर वे भारी बहुमत के साथ लौट रही हैं।

अजय झा

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