देवेशचंद्र ठाकुर और नवल किशोर यादव सत्‍तारूढ़ दल के उपनेता तो बने हैं, लेकिन सदन के नहीं

5332
0
SHARE

पटना : बिहार विधान परिषद में गुरुवार को दिन भर गहमागहमी रही। कई रिक्‍त व नवसृजित पदों पर मनोनयन किया गया। इसमें सबसे महत्‍वपूर्ण मनोनयन सत्‍तारूढ़ दल के मुख्‍य सचेतक और उपमुख्‍य सचेतक का था। जदयू के संजय गांधी मुख्‍य सचेतक और भाजपा के दिलीप जयसवाल उपमुख्‍य सचेतक मनोनीत हुए हैं। गांधी को कैबिनेट मंत्री और जयसवाल को राज्‍यमंत्री का दर्जा प्राप्‍त है।

इसके अलावा दो अन्‍य महत्वपूर्ण नियुक्ति सत्‍तारूढ़ दल के उपनेता की हुई है। मुख्‍यमंत्री दोनों सदनों के नेता होते हैं, चाहे व‍ह किसी सदन के सदस्‍य हों। भाजपा के नवलकिशोर यादव और जदयू के देवेश चंद्र ठाकुर सत्‍तारूढ़ दल के उपनेता मनोनीत किये हैं। इन दोनों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्‍त है। देवेश चंद्र ठाकुर और नवल किशोर यादव दोनों को संजय गांधी के समान सुविधाएं मिलेंगी। जैसा कि हमने पहले कहा कि मुख्‍यमंत्री सदन के नेता होते हैं, जबकि देवेश चंद्र ठाकुर और नवलकिशोर यादव विधान परिषद में अपनी-अपनी पार्टी के उपनेता हैं। मुख्‍यमंत्री की तर्ज पर वे सदन के उपनेता नहीं हैं। उपनेता एक राजनीतिक व्‍यवस्‍था है, संवैधानिक नहीं। जबकि सत्‍तारूढ़ दल का मुख्‍य सचेतक या उपमुख्‍य सचेतक होना संवैधानिक व्‍यवस्‍था है।

इसको इस तरह से आप आसानी से समझ सकते हैं। तारकिशोर प्रसाद विधान सभा में भाजपा विधायक दल के नेता और रेणु देवी उपनेता हैं। बाद में दोनों को उप मुख्‍यमंत्री बना दिया गया। जो हैसियत विधान सभा में अपनी पार्टी के लिए तारकिशोर प्रसाद की है, वही हैसियत विधान परिषद में अपनी पार्टी के नवल किशोर यादव और देवेश चंद्र ठाकुर की है। अंतर बस इतना है कि ता‍रकिशोर प्रसाद उप मुख्‍यमंत्री बनकर कैबिनेट मंत्री की सुविधा का उपयोग कर रहे हैं और नवल-देवेश कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्‍त कर उन्‍हीं सुविधाओं का उपयोग करेंगे। एक अंतर और है। तारकिशोर प्रसाद को देय सुविधाओं का खर्चा मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग उठायेगा,जबकि देवेश चंद्र ठाकुर और नवल किशोर यादव को देय सुविधाओं का खर्चा विधान परिषद सचिवालय उठायेगा।

बता दें कि इससे पहले नीतीश कुमार सरकार में रामाश्रय प्रसाद सिंह और गंगा प्रसाद दो-दो बार सत्‍तारूढ़ दल के उपनेता रह चुके थे। जदयू कोटे से रामाश्रय सिंह और भाजपा कोटे से गंगा प्रसाद उपनेता थे। पहली बार इनका मनोनयन 1 फरवरी, 2010 और दूसरी बार 30 मई, 2012 को हुआ था। इन राजनीतिक पदों पर सिर्फ मनोनयन का रिकार्ड होता है, विदाई की कोई तिथि तय नहीं होती है। इस कारण इन दोनों की विदाई कब हुई, कोई रिकार्ड नहीं है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो 2013 में भाजपा के सरकार से धकियाये जाने के बाद गंगा प्रसाद की इस पद से विदाई हो गयी होगी, क्‍योंकि तब भाजपा सत्‍तारूढ दल नहीं बची थी। किसी अन्‍य घटनाक्रम में रामाश्रय प्रसाद सिंह भी जिम्‍मेवारी से मुक्‍त हो गये होंगे। राजद के शासनकाल में रामनंदन सिंह भी सत्‍तारूढ़ दल के उपनेता रहे थे और कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल था। सत्तारूढ़ दल के उपनेता की जिम्मेवारियों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश तय नहीं है।

अजय झा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here