बेदाग नहीं हैं विधानसभा स्पीकर विजय सिन्‍हा

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बिहार विधान सभा के कुल 243 सदस्यों में से 163 सदस्‍यों पर विभिन्‍न थानों में मुकदमे दर्ज हैं। राजनीति की भाषा में ऐसे विधायकों को दागी की संज्ञा दी जाती है। लेकिन ऐसे लोगों को अपराधी नहीं कहा जा सकता है। थानों में दर्ज मुकदमों के आरोपी व्‍यक्तियों को चुनाव लड़ने की पूरी छूट है। ऐसे निर्वाचित विधायक मंत्री भी बनते हैं और सरकार भी चलाते हैं। यह अलग बात है कि नीतीश कुमार की नयी सरकार में मं‍त्री बने मेवालाल चौधरी को ऐसे ही आरोपों के आधार पर मंत्रालय संभालने के कुछ घंटे बाद ही बर्खास्‍त कर दिया गया था। जबकि फिलहाल 31 सदस्‍यीय नीतीश मंत्रिमंडल में 18 सदस्‍यों के खिलाफ विभिन्‍न थानों में मुकदमा दर्ज हैं और न्‍यायालयों में लंबित हैं।

मुकदमों की जानकारी मंत्रियों और विधायकों ने नामांकन के समय दायर शपथ पत्र में दी है। इन शपथ पत्रों के अध्‍ययन के आधार पर चुनाव सुधारों के लिए काम कर रही संस्‍था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट जारी की है। इसमें विधायकों के खिलाफ मुकदमों का विस्‍तृत विवरण भी दिया गया है। यह रिपोर्ट शपथ पत्र के आधार पर जारी की गयी है। इन मुकदमों में प्रक्रियागत कोई प्रगति हुई हो तो इसकी जानकारी उसमें नहीं है।

एडीआर की जारी रिपोर्ट के अनुसार, लखीसराय से निर्वाचित भाजपा के विधायक विजय कुमार सिन्‍हा पर एक मुकदमा दर्ज है, जो न्‍यायालय में लंबित है। 2010 में लखीसराय थाने में उनके खिलाफ आइपीसी के सेक्‍शन 171 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। एडीआर के अनुसार, यह सामान्‍य श्रेणी का मुकदमा है और एसीजेएम सह विशेष न्‍यायाधीश लखीसराय की अदालत में लंबित है। चुनाव के बाद इस मामले की अद्यतन स्थिति उपलब्‍ध नहीं है।

अजय झा

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