बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है ‘डीआरई’

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पटना : सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एन्ड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने आज वेबिनार के जरिए एक रिपोर्ट ‘डीआरई फॉर पावरिंग हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर इन बिहार’ जारी किया, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने और कोविड-19 महामारी के दौर में अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में विकेन्द्रीकृत अक्षय ऊर्जा (डीआरई) की व्यापक भूमिका को प्रस्तुत करना है। वेबिनार को संबोधित करते हुए और सीड के प्रयासों की सराहना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि “सात निश्चय-2 के तहत सबों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना राज्य सरकार की सर्वोपरि प्राथमिकता है। हम राज्य के सभी स्वास्थ्य केंद्रों को डीआरई सोल्यूशंस से मजबूत करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। बिहार सरकार इस रिपोर्ट की मुख्य सुझावों और सिफारिशों को गंभीरता से लेगी और तदनुरूप लागू करेगी, ताकि राज्य के जन-जन तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का व्यापक प्रसार हो।”

इस अवसर पर अश्विनी अशोक, हेड-रिन्यूएबल एनर्जी, सीड ने कहा कि “कोविड-19 के इस चुनौतीपूर्ण समय में अक्षय ऊर्जा बिहार के स्वास्थ्य केंद्रों में ऊर्जा उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की आम जन तक पहुंच के दोहरे उद्देश्य की पूर्ति करने में सक्षम है. दरअसल हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर का सोलराइजेशन राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने और सभी लोगों के हेल्थ कवरेज को पूरा करने की मुख्य कुंजी है। सोलर सॉल्यूशन द्वारा हेल्थकेयर सेंटर में निभाई गई सशक्त भूमिका की पुष्टि करते हुए डॉक्टर्स फॉर यू के संस्थापक डॉ रविकांत सिंह ने कहा, “मैंने खुद देखा है कि सौर ऊर्जा आधारित समाधान स्वास्थ्य केंद्र में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर सकते हैं। पटना के मसाढ़ी स्थित विस्टेक्स हॉस्पिटल इसकी मिसाल है, जहां सौर ऊर्जा संचालित 50 बेड का कोविड केयर सेंटर सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है. यह 15 kWp सौर ऊर्जा संयंत्र द्वारा संचालित 100% ऑफ-ग्रिड सिस्टम है, जहां आईसीयू और ओपीडी सेवाएं, लैब टेस्ट और स्टाफ कोरेन्टीन सुविधाएं डीआरई समाधानों के द्वारा बेहतरीन ढंग से चल रही हैं

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में डीआरई एप्लीकेशंस की सकारात्मक भूमिका की प्रशंसा करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के नेशनल प्रेसिडेंट, डॉ सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि “ग्रामीण अस्पतालों में डीआरई समाधान सामान्य और आपात स्थिति के दौरान भी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं, जैसे वैक्सीन रेफ्रिजरेटर, बेबी वार्मर और पोर्टेबल हेल्थ केयर किट आदि की सुविधाएँ प्रदान करने में यह बेहद उपयोगी हैं। मैं राज्य सरकार, आईएमए के सदस्यगणों और निजी अस्पताल प्रशासकों से आग्रह करता हूं कि वे अपने स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में डीआरई को तेजी से अपनाएं और उनका उपयोग करें। ऐसा करने से राज्य के हेल्थ इंडीकेटर्स में काफी सुधार आयेगा।”
इस वेबिनार के पैनल डिस्कशन में स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों ने भाग लिया, जिसमें बिहार वॉलेंटरी हेल्थ एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ मृदुल कुमार सहनी, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन में प्रोग्राम मैनेजर सुश्री सृष्टि महाजन और एम्स, पटना के कम्यूनिटी एवं हेल्थ फैमिली मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ चंद्रमणि सिंह आदि शामिल थे। वेबिनार में इस बात पर सर्वसम्मति बनी कि जनस्वास्थ्य क्षेत्र में डीआरई सोल्यूशंस का राज्यव्यापी विस्तार होना चाहिए। शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित हुए इस वेबिनार में स्वास्थ्य, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे सरकारी विभागों के प्रमुख प्रतिनिधियों, नेशनल हेल्थ मिशन, स्टेट हेल्थ सोसाइटी, बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवेलपमेंट एजेंसी के प्रतिनिधियों, डीआरई डेवलपर्स, थिंक-टैंक, शिक्षाविद, सामाजिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

विवेक कुमार की रिपोर्ट

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