गुप्तेश्वर पांडेय से पहले भी कई नौकरशाह सियासत में दे चुके हैं दस्तक

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नौकरशाहों का राजनीति में आना कोई नई बात नहीं है। गुप्तेश्वर पांडेय के उदाहरण से यह मामला फिर से ताजा हो गया है। इसके पहले भी कई आईएएस और आईपीएस भारतीय राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। इनमें से कुछ ने राजनीति की सीढ़ियों पर बहुत तेजी से ऊपर चढ़े तो, कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें राजनीति रास नहीं आई। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बिहार पुलिस के डीजी स्तर के दो पूर्व अधिकारी ताल ठोकने की तैयारी में नजर आ रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का किसी भी वक्त एलान हो सकता है। डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल 28 फरवरी, 2021 तक था। लेकिन 5 महीने पहले ही पद छोड़ने देने वाले पांडेय के राजनीति में हाथ आजमे की चर्चा जोरों पर है। वे किस राजनीतिक दल में शामिल होंगे और चुनाव लड़ने या नहीं उसे लेकर उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि उन्होंने बुधवार को कहा कि वे अभी किसी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं और जब वह ऐसा करेंगे तो सभी को बता देंगे। 

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वे किसी राजनीतिक दल में नहीं हैं और आगे भी किसी दल से जुड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है। जहां तक समाज सेवा की बात है, वे राजनीति में गए बिना भी ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, मेरी सेवानिवृत्ति का सुशांत सिंह राजपूत मामले से कोई लेना-देना नहीं है। मैंने केवल एक असहाय पिता की मदद की है। उन्होंने आगे कहा कि मैंने देश की सेवा में तीन दशक से अधिक का समय बिताया है और कोई भी मेरी ईमानदारी पर उंगली नहीं उठा सकता। इस बीच मीडिया से बातचीत में गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा, “बिहार की जनता मुझसे बहुत प्यार करती है। मेरे पास 12 सीटों से चुनाव लड़ने का ऑफर है। मैं कहीं से भी चुनाव लड़ सकता हूं और जीत हासिल कर सकता हूं। लोगों द्वारा चुनाव लड़ने को वीआरएस से जोड़कर देखा जा रहा है, जो गलत है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन पार्टियों की तरफ से ये ऑफर मिला है।
गुप्तेश्वर पांडेय से पहले बिहार के तीन पूर्व डीजीपी सियासी अखाड़े में उतर चुके हैं। पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा ने नालंदा से चुनाव लड़ा था, जहां से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई के लिए चर्चा में रहे पूर्व डीजीपी डीपी ओझा ने भी चुनाव राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। ओझा ने बेगूसराय सीट से सीपीआई (एमएल) के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा। हालांकि वे भी चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो सके और अब सियासत से दूर रहते हैं।अब आने वाले समय में ही पता चलेगा कि किस राजनीतिक दल के टिकट से गुप्तेश्वर पांडेय चुनावी मैदान में उतारते हैं।

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