केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में MSME पर लिए गए कई अहम फैसले

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कोरोना वायरस संकट के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि कैबिनेट ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। किसानों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है। जावड़ेकर ने कहा कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) की परिभाषा को बदल दिया गया है। उन्होंने बताया कि एमएसएमई के लिए 50,000 करोड़ की इक्विटी का प्रस्ताव पहली बार आया है। जावड़ेकर ने कहा, रेहड़ी पटरी वालों के लिए विशेष सूक्ष्म ऋण योजना शुरू की जाएगी। इस योजना का लाभ 50 लाख लोगों को मिलेगा। उन्होंने किसानों के लिए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उसकी कुल लागत का डेढ़ गुना ज्यादा रखने का वादा सरकार पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने 14 खरीफ फसलों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी, किसानों को लगात से कम से कम 50 से 83 प्रतिशत तक ऊंचा मूल्य मिलेगा। वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों को लेकर हुए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि गेंहू की खरीद 360 लाख मीट्रिक टन हो चुकी है। 14 फसलों के लिए जो समर्थन मूल्य की सिफारिश थी उसे मान लिया गया है। तोमर ने कहा कि यदि किसान समय पर अपना कर्ज चुकाता है तो उसे 4 फीसदी में ही कर्ज मिलता है। लॉकडाउन की वजह से सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने के लिए पहले 31 मई तक समय दिया था, लेकिन अब उसे बढ़ाकर 31 अगस्त तक किया गया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे देश में 6 करोड़ एमएसएमई है जिससे 11 करोड़ रोजगार मिलता है।माइक्रो में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को एक कर दिया गया है। एक्सपोर्ट के टर्नओवर को एमएसएमई की लिमिट से बाहर किया गया है। इससे 2 लाख एमएसएमई को फिर से शुरू करने में फायदा होगा।

अजय झा

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