नहीं रहे संस्कृत जगत के प्रख्यात विद्वान डॉ. महेश झा, 80 साल की उम्र में दिल्ली में निधन

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संस्कृत जगत के प्रख्यात विद्वान कवि डॉ. महेश झा का 80 साल के उम्र में निधन हो गया। वे लीवर की समस्या से पीड़ित थे, विगत 15 दिनों से दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। 29 अप्रैल (बुधवार) की संध्या मैक्स अस्पताल में इलाज दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार गंगा किनारे गढ़ मुक्तेश्वर घाट पर किया गया। उनके जेष्ठ पुत्र मिथिलेश कुमार झा ने मुखाग्नि दिया। डॉ. महेश झा बिहार के मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी प्रखंड के पस्टन गांव के रहनेवाले थे। इन्होंने अपने जीवन काल में 125 पुस्तकों की रचना की।

डॉ. महेश झा

डॉ. झा अपनी रचनाओं में आदर्शवादी परंपरा औऱ नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखते थे। जहां उन्होंने श्रीमद् भगवत गीता का अनुवाद मैथिली में किया तो वहीं कुरान का अनुवाद संस्कृत में। वे जीवन के अंतिम छण तक काव्य साधना में लीन रहे। संस्कृत जगत के इस अपूर्णीय क्षति को पूरा करना संभव नहीं है। डॉ. महेश झा अपने बाद परिवार में दो पुत्र, दो पुत्री,पौत्र -पौत्री एवं भरे- पुरे परिवार को छोड़ गए। उनके निधन से पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त हो गई है। इनके द्वारा लिखी गई प्रमुख पुस्तकें हैं – मैथिली गीता (श्रीमद् भगवत गीता का मैथिली में पद्यानुवाद), कुरान (संस्कृत में ), बसंत शतकम्, चंडिका शतकम् , वैद्यनाथशतकम्, बाबा मुक्तेश्वर शतकम् ।

मधुबनी से अनिल कुमार अमन की रिपोर्ट

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