दूसरे चरण के लॉकडाउन में ना हो पहले जैसी गलतियां

10594
0
SHARE

कोरोना के कहर से बचने के लिए आखिरकार वही हुआ, जिसके कयास लगाए जा रहे थे। 25 मार्च से जारी 21 दिन के लॉकडाउन को आज 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया। यानी कोरोना वायरस की वजह से लोगों को अगले 19 दिन और घरों में ही बंद रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह 10 बजे देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन बढ़ाने का एलान किया। पीएम ने कहा कि इस बार बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे।

जहां कोरोना नहीं फैलेगा, वहां 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों पर सशर्त छूट मिलेगी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। आप सभी देशवासियों की तपस्या, आपके त्याग की वजह से भारत अब तक, कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा है। उन्होंने कहा,आप लोगों ने कष्ट सहकर भी अपने देश को बचाया है। मैं जानता हूं, आपको कितनी दिक्कते आई हैं। किसी को खाने की परेशानी, किसी को आने-जाने की परेशानी, कोई घर-परिवार से दूर है। वहीं मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन पर आज अचानक हजारों की संख्या में मजदूर पहुंच गए। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के रहने वाले इन मजदूरों को भरोसा था कि आज लॉकडाउन खत्म हो जाएगा और वे पहली ट्रेन से ही अपने गांव वापस चले जाएंगे। लेकिन जब इन मजदूरों को जानकारी मिली की लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया है तो इनके अंदर एक भय का माहौल पैदा हो गया। कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई में इतनी भारी भीड़ देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। इसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिसवालों को लाठीचार्ज करना पड़ा।

लॉकडाउन के पहले चरण में देशवासियों ने कई गलतियां कीं, जिनसे आगे हमें न सिर्फ सीखने की जरूरत है बल्कि उन गलतियों के दोहराने से भी बचना होगा। तभी कोरोना के खिलाफ इस जंग में हमें पूरी तरह से फतह मिलेगी।गौरतलब है कि पीएम मोदी के सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की लोगों ने खूब धज्जियां भी उड़ाई।

पीएम मोदी ने 22 मार्च को जहां शाम 5 बजे ताली और थाली बजाकर कोरोना योद्धाओं का उत्साह बढ़ाने को कहा, इसी तरह 6 अप्रैल को रात 9 बजे 9 मिनट तक अपने घरों की बत्तियां बुझाकर दीया जलाने का आह्वान किया, लेकिन दोनों ही बार कई अतिउत्साही लोगों ने जमकर तमाशा किया। दीये की जगह पटाखे छोड़े गए। 100-200 की भीड़ इकट्ठी कर पहले ताली-थाली रैली निकाली गई फिर मशाल जुलूस का भी आयोजन हुआ। देश के हर कोने से इस तरह के वीडियो  और फोटो सामने आए, जिससे सिर शर्म से झुक गया।

देश में भले ही कोरोना संक्रमितों की संख्या 10 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी हो, 353 लोगों की मौत हो चुकी हो, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की मुस्तैदी के चलते हजार से अधिक लोग कोरोना से ठीक भी हुए। सरकारी क्वारंटीन सेंटर में अपना इलाज कराकर लौटे इन लोगों को कोरोना वॉरियर्स कहा जाए तो गलत नहीं होगा।आमतौर पर जब लोग बीमार होते हैं तो उनके पड़ोसी और रिश्तेदार उनका साथ देते हैं और हिम्मत बढ़ाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस के मामले में ऐसा नहीं देखा जा रहा। कई जगहों पर मरीजों के प्रति सहानुभूति रखने के बजाय असंवेदनशीलता दिखाई जा रही है। मरीजों और उसके करीबियों से अछूत की तरह व्यवहार किया जा रहा है। देश में सामाजिक बहिष्कार जैसी भी खबरें आ रहीं हैं।

तब्लीगी जमात जैसी गलतियां न हो दुबारा – फरवरी से 1 मार्च के बीच कुआलालंपुर में, 11-12 मार्च को पाकिस्तान के लाहौर में और फिर 13 मार्च को नई दिल्ली में तब्लीगी जमात का आयोजन हुआ। यहां ब्रूनेई, कंबोडिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों से लोग पहुंचे थे। पूरी दुनिया जहां हाई अलर्ट पर थी, तब हजारों-लाखों लोगों की भीड़ ने कोरोना वायरस के फैलने में जमकर मदद की। वैसे तो कोविड-19 के मद्देनजर बड़े आयोजनों पर पाबंदी लगा दी गई थी, लेकिन फिर भी निजामुद्दीन में भारी भीड़ जुटी और हमारी एजेंसियों भी इसे रोकने में नाकाम रहीं। तब्लीगी जमात के चलते दुनिया के कई देशों में हालात और खराब हो गए हैं। भारत में कोरोना पॉजिटिव के अधिकतर मामले तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों के ही मिले हैं। यह आयोजन भारत के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हुआ है। तमाम लोगों की मौत के बाद इसका मुखिया मोहम्मद साद अंडरग्राउंड हो चुका है। कहने का तात्पर्य है कि लॉकडाउन के इस अगले चरण में हमें इस तरह किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन से बचना होगा। पिछली गलतियों से सबक लेते हुए बतौर हिंदुस्तानी हमें संकटपूर्ण हालात में एक संवेदनशील नागरिक का परिचय देना होगा।

अजय झा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here