निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात की लापरवाही, देशवासियों पर पड़ेगा भारी

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पूरे देश में इस समय अगर किसी बात की सर्वाधिक चर्चा हो रही है तो वो है निजामुद्दीन स्थित मरकज और उसमें आयोजित हुआ तब्लीगी जमात का कार्यक्रम। इस आयोजन में शामिल लोग पूरे देश में फैल चुके हैं और उन्हें खोजने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। जगह-जगह से इस आयोजन में शामिल होने वाले लोगों की तलाश की जा रही है और साथ ही उनके पकड़े जाने की सूचना मिल रही है। इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को पकड़कर एकांतवास में भेजा जा रहा है। इन जमातियों की एक छोटी सी गलती ने एक सौ तीस करोड़ देशवासियों के त्याग और बलिदान पर पानी फेर दिया है। इन जमातियों को कौन समझाए की सरकार द्वारा लागू किए गए लॉकडाउन का उल्लंघन करके आप न सिर्फ अपनी खुद की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं बल्कि आप कई औरों की जिंदगी को भी खतर में डाल दिया है। दिल्ली में इस्लामिक सेंटर में मौजूद 1500 लोगों में से 450 लोगों में वायरस के लक्षण नजर आए हैं।

अब तक तबलीगी जमात के लोगों या उनके संपर्क में आए 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 24 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा फिलहाल मरकज से होकर गए हजारों लोगों की पूरे देश में तलाश की जा रही है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस समय देश के 12 राज्यों में इस जमात के 824 मौलाना मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश मलेशिया और इंडोनेशिया समेत दूसरे मुल्कों से होकर आए हैं। राज्यों की बात करें तो कर्नाटक में 50, पश्चिम बंगाल में 70, यूपी में 132, झारखंड में 38, हरियाणा में 115, ओडिशा में 11, एमपी में 49 और राजस्थान में 13 मौलाना मौजूद हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये मौलाना उन 300 से ज्यादा विदेशी मौलानाओं से अलग हैं जो निजामुद्दीन में 13 से 15 मार्च तक चले मजहबी इजलास में शामिल हुए थे। तबलीगी जमात का दावा है कि यह एक रूटीन सभा थी, लेकिन वे इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहे हैं कि दिल्ली सरकार ने 13 मार्च को 200 से ज्यादा लोगों के किसी भी तरह के समारोह पर बैन लगा दिया था। लेकिन ये मौलाना अपनी हरकतों से बाज नहीं आये अभी तक मरकज से 2361 लोगों को निकाला गया। फिर उनकी जांच की गई और उन्हें क्वारनटाइन किया गया। इनमें से 600 से अधिक लोगों में COVID-19 के लक्षण पाए गए, जिनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

इस जमात के लोगों के संपर्क में आने के बाद जिन लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ है, जिनके परिवार वालों की जान खतरे में पड़ी, उन सबके लिए मौलाना साद जिम्मेदार हैं।अल्लाह को मानने वालों को अल्लाह के नाम पर इजलास में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया। जमात और उसके मुखिया देशभर में वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने दिल्ली को जानबूझकर कोरोना वायरस के गढ़ों में से एक बना दिया। यह देश के खिलाफ गुनाह है। जमात और मौलाना साद के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मैं तबलीगी जमात के नेताओं से पूछना चाहता हूं: यदि काबा, मक्का और मदीना की मस्जिदें, वेटिकन सिटी, वैष्णो देवी, तिरुपति, सिद्धिविनायक, सोमनाथ और काशी विश्वनाथ मंदिर कोरोना वायरस के चलते बंद हो सकते हैं, तो उन्हें इस्लाम और अल्लाह के नाम पर इतना बड़ा इजलास करने की क्या जरूरत थी? ऐसे समय में जब भारत में मस्जिदों ने बाहरी लोगों को नमाज अदा करने से रोक रखा है, गुरुद्वारों में बाहरी लोग अरदास नहीं दे सकते, मंदिरों ने भक्तों को अंदर आने से रोक दिया है, तो आखिर जमात ने मजहब के नाम पर यह गुनाह क्यों किया?

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर के 204 देश कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में हैं। 10 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं और अब तक 47000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक डेढ़ लाख लोगों का इलाज भी किया जा चुका है।भारत में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के 2000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अब तक 68 लोगों की मौत हो चुकी है।महाराष्ट्र में सबसे अधिक 335 मामलों की पुष्टि हुई है। केरल में 265, तमिलनाडु में 234, दिल्ली में 152, उत्तर प्रदेश में 116, कर्नाटक में 110, राजस्थान में 108, तेलंगाना में 97, आंध्र प्रदेश में 87, गुजरात में 87, मध्य प्रदेश में 86, जम्मू-कश्मीर में 62, पंजाब में 46, हरियाणा में 43, पश्चिम बंगाल में 37, बिहार में 25 चंडीगढ़ में 15, असम में 13, लद्दाख में 13, अंडमान-निकोबार में 10, छत्तीसगढ़ में 9, उत्तराखंड में 7, गोवा में 5, ओडिशा में 4, हिमाचल प्रदेश में 3, पुडुचेरी में 3, झारखंड, मणिपुर और मिजोरम में एक-एक लोग COVID-19 से संक्रमित पाए गए हैं.कोरोना वायरस के डर ने दुनिया को अपने घरों में कैद कर दिया है। सभी देश अपने नागरिकों को सलाह दे रहे हैं कि वह जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलें और भीड़ वाले इलाकों में ना जाएं।लेकिन इन जमातियों को कौन समझायेगा की अगर देश के हालात नहीं सम्भले तो हिंदुस्तान में भी लाशों का अम्बार लग जायेगा।

अजय झा

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