OYO कंपनी का गोरखधंधा

11779
0
SHARE

OYO भले ही दुनिया भर में कम किराये में होटल के कमरे उपलब्ध कराने के लिए मशहूर है, लेकिन इसकी व्यावसायिक नीतियों पर भी सवाल उठने लगे है। ओयो ने 2023 तक दुनिया की सबसे बड़ी होटल चेन बनने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन कंपनी के वित्तीय व अदालती दस्तावेज और पुराने कर्मचारियों का कहना है कि इसकी नीतियां संदेहास्पद हैं। ओयो की वेबसाइट पर उन होटलों के नाम भी दर्ज हैं जो उससे कभी नहीं जुड़े। कंपनी के कई मौजूदा एवं पुराने कर्मचारियों की मानें तो कमरों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए ऐसा किया जाता है। ओयो के नेटवर्क में शामिल सैकड़ों होटलों के पास लाइसेंस तक नहीं हैं। कानूनी पचड़े से बचने के लिए कंपनी पुलिस और अन्य अधिकारियों को यदा-कदा मुफ्त ठहरने की सुविधा देती है।कंपनी से जुड़े होटल मालिकों का आरोप है कि कंपनी उनसे अतिरिक्त फीस लेने के बावजूद उनके हिस्से का पैसा नहीं देती। पैसे मांगने पर इन होटलों में कस्टमर सर्विस खराब होने का बहाना बनाया जाता है। कई होटल मालिक अब कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराने की तैयारी में हैं।

वहीं कंपनी के मालिक रितेश अग्रवाल ने स्वीकार किया कि ओयो की वेबसाइट पर कई ऐसे होटलों के नाम हैं जो उससे जुड़े नहीं हैं। कंपनी अपने रिकॉर्ड में उनके कमरों को भरा हुआ दिखाती है और होटल मालिकों को उससे जुड़ने के लिए मनाती है। कंपनी के भारतीय परिचालन प्रमुख आदित्य घोष ने भी माना है कि कंपनी से जुड़े कई होटलों के पास जरूरी लाइसेंस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी खराब कस्टमर सर्विस के लिए होटलों पर जुर्माना लगाती है। होटल मालिक इसका विरोध करते हैं। कर्मचारियों की शिकायतों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसका कारण प्रशिक्षण की कमी है। रितेश अग्रवाल ने 2013 में ओयो की शुरुआत की थी। उनका मकसद देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद कम किराए वाले छोटे-बड़े होटलों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना था। कंपनी होटलों को अपने नेटवर्क में शामिल करने के बाद अपनी वेबसाइट के जरिये उनकी ऑनलाइन बुकिंग करती है। बदले में किराये का एक हिस्सा ओयो को मिलता है। कंपनी कुछ जगहों पर अपने होटल भी चलाती है। कंपनी अब 80 देशों में फैल चुकी है और 12 लाख से ज्यादा कमरे इसके प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। 20 हजार से ज्यादा कर्मचारी इसके लिए काम करते हैं। कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि यहां काम का माहौल कभी अच्छा नहीं था, लेकिन पिछले एक साल में दबाव कई गुना बढ़ा है। बता दें कि कर्मचारियों पर नए कमरे जोड़ने का इतना दबाव होता है कि वे बिना सुविधाओं वाले होटल के नाम भी शामिल कर लेते हैं। वेबसाइट पर इनकी फर्जी तस्वीरें लगाकर ग्राहकों को लुभाया जाता है। कंपनी जानबूझकर होटल मालिकों के पैसे रोककर रखती है। कंपनी के कर्मचारी खुद भी ग्राहकों की आवाजाही के रिकॉर्ड में हेराफेरी करते हैं और अतिरिक्त कमाई करते हैं। इतना ही नहीं, पुराने कर्मचारी बदनामी से बचने के लिए कंपनी पर दुष्कर्म जैसे अपराधों को छिपाने का आरोप भी लगाते हैं। वहीं आगरा के थाना सदर में ओयो कंपनी के मालिक, लोकल मैनेजर सहित तीन के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। शहीद नगर स्थित चाणक्य होटल के मैनेजर ने धोखाधड़ी कर 45 लाख का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीँ एकऔर मामला सामने आया है कुछ लोग शिमला घुमने आए थे, उन्होंने ओयो के द्वारा राम बाजार में एक होटल में 4 कमरे बुक करवाए थे। बुकिंग करने के साथ ही एडवांस के रूप में 2500 रुपये भी कंपनी के खाते में जमा करवाए। भारी बारिश के बीच अपना सामान उठाकर यह ग्रुप जब होटल पहुंचा तो पता चला कि इनके नाम पर यहां कोई कमरा बुक ही नहीं है।

आज प्रेमी प्रेमिकाओं के पास सबसे बड़ी चुनौती पर्सनल स्पेस है। जैसा हमारा सामाजिक ताना बाना है प्रेमियों के लिए पब्लिक प्लेस पर मिलना कई मायनों में टेढ़ी खीर है। ओयो ने कपल्स की इस परेशानी को समझा और ऐसे ऑफर रखे जिसमें अब अविवाहित कपल भी होटल में कमरा बुक कर सकता है। इसके लिए कपल को ओयो एप पर अपनी रिलेशनशिप से संबंधित सवालों के जवाब देने होते हैं। यदि कपल अविवाहित हैं तो उन्हें ये बात मेंशन करनी होती है और उन्हें कमरा मिल जाता है। भले ही कमाई के नाम पर छुपते छुपाते मिलने वाले आशिकों के लिए होटल चेन ओयो ने आसरा देने की पहल की हो और उसके ऑफर को आशिकों ने हाथों हाथ लिया हो मगर अब वो उन लोगों से मोर्चा ले रहा है जो संस्कृति की हिफाजत में आशिकों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। बीते दिनों कुछ महिलाएं कोयंबटूर स्थित डीएम के ऑफिस पहुंची और उन्होंने एक बेहद अजीब सी शिकायत की। कलेक्टर से मिलने आने वाली महिलाओं ने बताया कि एक ओयो होटल ‘अविवाहित जोड़ों’ को प्रवेश दे रहा है जिससे संस्कृति का हनन हो रहा है। महिलाओं ने मांग की कि होटल को बंद किया जाए। दिलचस्प बात ये रही कि प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ कुछ स्थानीय निवासी भी थे और इन्होंने ही डीएम को ‘संस्कृति के दूषित होने’ का हवाला दिया था। अगले ही दिन तहसीलदार ने आई हुई शिकायत पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की और होटल सील कर दिया। साथ ही जो अविवाहित कपल वहां रह रहे थे उन्हें पुलिस स्टेशन लाया गया। उनकी जमकर फजीहत हुई और तमाम सवालों के जवाब उन्हें देने पड़े। बता दें कि बीते साल दिसंबर में इसी मामले को लेकर हुई सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने एक आदेश दिया था जिसमें कहा गया था ऐसी स्थिति में होटल को सील नहीं किया जा सकता। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि जब दो वयस्कों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप को अपराध नहीं माना जाता है, तब एक अविवाहित जोड़े द्वारा होटल में रहना कैसे अपराध की श्रेणी में आ गया? कोर्ट ने इस मामले को एक्सट्रीम स्टेप बताया था और इस प्रक्रिया को अवैध कहा था। गौरतलब है कि होटल आज भी सील है और आज भी होटल के आस पास रह रहे लोग नैतिकता और संस्कृति की दुहाई दे रहे हैं।

अजय झा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here