2019 की 20 बड़ी घटनाएं

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साल 2019 कई मायनों में यादगार रहा। इस साल देश-विदेश में हुई घटनाओं ने इसे खास बनाया। एक साल के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जो लंबे समय तक जेहन में कैद रहेंगी। इनमें से कई घटनाएं ऐसी रहीं जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने वाली साबित हुई हैं।कुछ घटनाओं और फैसले भारत के भविष्य पर असर छोड़ेंगे। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कुछ ऐसे फैसले आए जो भविष्य के लिए नजीर बन गए। अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी ऐसी घटनाएं सामने आईं जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा। हम आपको बता रहे हैं 2019 की ऐसी ही 20 बड़ी घटनाएं जिन्हें भुला पाना कभी संभव नहीं होगा। आइए जानते हैं ऐसी ही 20 बड़ी घटनाओं के बारे में।

मोदी सरकार पार्ट 2 – 2019 में नरेंद्र मोदी का जादू फिर मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला। आम चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सियासी पंडितों को भी चौंका दिया। भाजपा को इस साल 303 सीटों पर जीत मिली जबकि 2018 में उसने 282 सीटें जीती थीं। इसी के साथ नरेंद्र मोदी जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद तीसरे व पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। पीएम मोदी ने एक बार फिर वाराणसी से चुनाव लड़ा और चार लाख 79 हजार वोटों से जीते। इस दौरान उनकी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अुच्छेद 370 हटाने जैसा ऐतिहासिक फैसला लिया।
राहुल गांधी का इस्तीफा – साल 2019 में कांग्रेस में उस वक्त भूचाल आया जब राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद जुलाई में राहुल ने पद से इस्तीफा दे दिया। राहुल गांधी ने चार पन्नों का इस्तीफा लिखकर इसे ट्विटर पर शेयर भी किया था। कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफा देने वाले राहुल गांधी ने कहा था- मैं एक कांग्रेसजन के तौर पर पैदा हुआ, यह पार्टी हमेशा मेरे साथ रही है और यह मेरी रगो में है और हमेशा रहेगी। तमाम मान मनौव्वल के बाद भी राहुल नहीं माने। कार्यकर्ताओं और बड़े नेताओं ने धरना भी दिया, लेकिन राहुल टस से मस नहीं हुए। इसके बाद सोनिया गांधी को दोबारा कांग्रेस की कमान दी गई। इसी बीच प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी राजनीति में प्रवेश किया।
बैंकों का विलय – 30 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कई बैंकों के आपस में विलय का एलान किया। इसी साल वित्तीय वर्ष में देना और विजया बैंक के विलय का एलान किया गया था। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों के विलय का एलान करते हुए कहा था कि यूनाइटेड बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और पंजाब नेशनल बैंक का विलय होगा। दूसरी ओर केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का आपस में विलय होगा। तीसरा बड़ा विलय यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का जबकि इलाहाबाद बैंक के साथ इंडियन बैंक का विलय होगा। इस फैसले के बाद इन 10 बैंकों की जगह केवल चार राष्ट्रीयकृत बैंक होंगे, जबकि पहले से मौजूद आठ अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों को मिलाकर देश में सरकारी बैंकों की संख्या केवल 12 रह जाएगी।
जेट एयरवेज हुई ठप – 17 अप्रैल 2019 की तारीख देश के विमानन इतिहास में याद रखी जाएगी क्योंकि इसी दिन जेट एयरवेज के विमान ने अपनी आखिरी उड़ान भरी थी। इसके बाद अनिश्चितकाल के लिए इस कंपनी की सेवाएं बंद हो गई हैं। 17 अप्रैल को रात 10.30 बजे अमृतसर के हवाई अड्डे से मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए जेट एयरवेज के विमान ने अंतिम उड़ान भरी थी। जेट एयरवेज के धड़ाम होने से यात्रियों सहित कंपनी के कर्मचारियों कतो भी कई दिक्कतें आई। कंपनी लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रही थी। जेट एयरवेज के बंद होने से करीब 22 हजार लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई। स्किल्ड से लेकर सेमी-स्किल्ड तक, जेट के तमाम कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
महाराष्ट्र का सियासी रण – महाराष्ट्र का सियासी रण भी इस साल चर्चा में रहा। ऐतिहासिक रूप से यहां के सियासी घटनाक्रम को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यहां भाजपा शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा और स्पष्ट बहुमत हासिल किया। लेकिन शिवसेना ने सीएम पद को लेकर 50-50 का फॉर्मूला रखकर नया विवाद छेड़ दिया। उद्धव ठाकरे ढाई साल के लिए सीएम पद को लेकर अड़ गए। नतीजतन भाजपा को शिवसेना से अलग होना पड़ा। सियासी नाटक ने ऐसा करवट ली कि भाजपा ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार के साथ मिलकर रातोंरात सरकार बना ली। इसे लेकर जबरदस्त सियासी हंगामा मचा, बयानों की बाढ़ आई और आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लग गई। लेकिन ये सरकार महज साढ़े तीन दिन ही टिक सकी।अजित पवार विधायकों की व्यवस्था नहीं कर सके और देवेंद्र फडणवीस को बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। उद्धव ठाकरे ने सीएम पद की कमान संभाली। पहली बार ठाकरे परिवार से कोई सीएम बना।
आंध्र में सत्तापलट – इस साल आंध्र प्रदेश में भी बड़ी सियासी उठापटक हुई। यहां एक साथ हुए लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जगनमोहन रेड्डी का नाम चर्चा में आया। 46 साल के वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मुखिया जगनमोहन रेड्डी ने राज्य से चंद्रबाबू नायडू की सरकार को उखाड़ फेंका। आंध्र प्रदेश में हुए चुनाव में उनका जादू इस कदर लोगों के सिर चढ़कर बोला कि वाईएसआर ने लोकसभा की 25 में से 22 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं विधानसभा चुनाव में भी तेलुगू देशम पार्टी को करारी शिकस्त देते हुए 175 में से 151 सीटों पर जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद जगनमोहन रेड्डी राज्य के नए सीएम बने।
राम मंदिर पर फैसला – मोदी सरकार के कार्यकाल में अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। शीर्ष अदालत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि 2.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी। साथ ही मुस्लिम पक्ष को नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने के भी निर्देश दिए। इस फैसले के साथ ही दशकों पुराना ये विवाद हमेशा के लिए सुलझ गया। फैसले को तकरीबन सभी पक्षों ने स्वीकारा। इस फैसले के खिलाफ कहीं भी किसी तरह के विरोध प्रदर्शन या हिंसा की खबर नहीं आई। ये फैसला देश के लिए एक नजीर बना और आने वाले समय में भारत का भविष्य संवारने वाला फैसला साबित हुआ है। हालांकि इस फैसले के खिलाफ एआईएमपीएलबी, हिंदू महासभा सहित करीब 22 पक्ष पुनर्विचार याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन अदालत ने इन्हें खारिज कर दिया।

अनुच्छेद 370 हटाया – 5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का एलान किया। सरकार ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी एक संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के प्रावधान वाला एक विधेयक पेश किया। गृह मंत्री अमित शाह ने साथ ही जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 भी पेश किया। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी एक संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने के प्रावधान वाले विधेयक का विरोध किया। इसे लेकर देशभर में सियासी संग्राम छिड़ा और विपक्ष ने सरकार को निशाने पर लिया। कश्मीर में पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती सहित कई नेताओं को नजरबंद भी किया गया। विदेशी मीडिया में भी इस मामले की गूंज सुनाई पड़ी।
तीन तलाक बिल बना कानून – इसी साल 30 जुलाई 2019 को केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक बिल को पास कराने में कामयाबी हासिल की। राज्यसभा में तीन तलाक बिल को मंजूरी मिलने के साथ ही इसके कानून में बदलने का रास्ता साफ हो गया। संसद के दोनों सदनों में तीन तलाक विधेयक पारित हो जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे मुस्लिम महिलाओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम बताया। पीएम मोदी ने कहा कि पूरे देश के लिए ये एक ऐतिहासिक दिन है। करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है। सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है। इस ऐतिहासिक मौके पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं। इस पर भी खूब सियासी संग्राम मचा लेकिन कानून अमल में आ ही गया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी इसपर हरी झंडी दे चुका था।
नागरिकता कानून लागू – नरेंद्र मोदी सरकार ने 11 दिसंबर 2019 को एक और इतिहास रचा। इस दिन नागरिकात संशोधन बिल को राज्यसभा से भी पारित करा लिया गया। अगले ही दिन राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक (Citizenship Amendment Bill (CAB) कानून बनकर लागू हो गया। लेकिन इस बिल के कानून बनने के साथ ही देश में एक नया संग्राम छिड़ गया। सबसे पहले विरोध शुरू हुआ असम में, धीरे-धीरे विरोध की चिंगारी दूसरे राज्यों में फैल गई। प. बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए। हिंसा में अबतक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा हिंसा बंगाल, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश, बिहार में हुई। लाखों-करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को फूंका गया, वाहनों को आग लगाई गई। दिल्ली में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जामिया मिल्लिया में हिंसा हुई। हालांकि महाराष्ट्र, केरल, उत्तराखंड, राजस्थान जैसे राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए। सरकार ने इस पर अपनी तरफ से सफाई भी दी है, लेकिन कानून का विरोध जारी है।
झारखंड में मुरझाया कमल – इस साल एक तरफ जहां भाजपा सरकार ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए वहीं उसे कई सियासी झटके भी लगे। महाराष्ट्र के बाद दूसरा बड़ा झटका उसे झारखंड में लगा। भाजपा यहां अपनी सत्ता बचाए नहीं रख सकी और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने उसे बुरी तरह हराया। रघुवर दास खुद ही चुनाव हार बैठे। उन्हें भाजपा के बागी व कद्दावर नेता सरयू राय ने बड़े अंतर से हराया। महाराष्ट्र के बाद भाजपा को लगा ये दूसरा बड़ा झटका था। हेमंत सोरेन की अगुवाई में विपक्षी गठबंधन ने भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। इसके साथ ही सवाल उठने लगे कि क्या भाजपा राज्यों में लगातार कमजोर होती जा रही है।
हैदराबाद दुष्कर्म कांड – ये एक ऐसा कांड रहा जिसने देश ही नहीं पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। दिल्ली के निर्भया कांड की पुनरावृत्ति हैदराबाद में दिखी। 26 नवंबर को चार लोगों ने तेलंगाना में साइबराबाद के शादनगर में एक युवा महिला पशु चिकित्सक (27) के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे जिंदा ही जला दिया। जिस तरह निर्भया को मदद का भरोसा देकर बस में बैठा लिया गया था, उसी तरह मदद का झांसा यहां भी देकर इंसानियत को शर्मसार कर दिया गया। लेकिन, इस मामले में हैरान करने वाला मोड़ आया 6 दिसंबर को आया जब खबर आई कि चारों आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। इसे लेकर पुलिस पर सवाल भी उठे, जांच भी बैठाई गई, लेकिन कई लोगों ने पुलिस की कार्रवाई को सही भी ठहराया। अदालत ने इस पर जांच बैठाई और मारे गए आरोपियों का दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया गया।
2019 क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल विवाद – 2019 क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल खूब विवादित रहा और जिस अंदाज में मेजबान इंग्लैंड को जीत मिली उसपर सवाल उठाए गए। क्रिकेट इतिहास में ये पहला मौका था जब वर्ल्ड कप में ओवर थ्रो के चलते किसी टीम को जीत मिली। न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल द्वारा फेंका गया थ्रो बल्लेबाज बेन स्टोक्स के बल्ले से लगकर बाउंड्री पार कर गया था और टीम को 6 रन मिल गए जिसने इंग्लैंड को पहली बार 50 ओवर क्रिकेट का ताज दिला दिया। इस पूरे मामले में दुनियाभर में चर्चा हुई थी और लोगों ने इस नियम को लेकर ICC की भी काफी आलोचना की। क्रिकेट इतिहास के फाइनल की ये सबसे विवादास्पद जीत रही।
गांगुली बने बीसीसीआई अध्यक्ष – इस साल भारतीय क्रिकेट में भी अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला। 23 अक्तूबर 2019 को टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली अधिकारिक तौर पर बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष चुन लिए गए। मुंबई में बोर्ड के हेडक्वार्टर में गांगुली को बोर्ड की कमान सौंपी गई। सौरव गांगुली को इस पद के लिए निर्विरोध चुना गया था। गांगुली का कार्याकाल 10 महीने का होगा।
इंग्लैंड में बोरिस जॉनसन की जीत – इस साल ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की। बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को 650 सीटों वाली संसद में 364 सीटें मिलीं। चुनाव में कश्मीर में 370 हटाने के फैसले का विरोध करने वाली लेबर पार्टी को महज 203 सीटें ही मिलीं। चुनाव परिणाम के साथ ही यूरोपीय संघ से ब्रिटेन का अलगाव का रास्ता साफ हो गया। इस चुनाव में एक दर्जन से अधिक भारतवंशी उम्मीदवारों ने भी जीत का परचम लहराया।
श्रीलंका धमाके – 21 अप्रैल 2019 को श्रीलंका में हुई एक घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। ईस्टर की प्रार्थना के दौरान रविवार सुबह श्रीलंका छह सिलसिलेवार धमाकों और दो आत्मघाती हमलों से श्रीलंका दहल उठा। राजधानी कोलंबो के अलावा तटीय शहर नेगेंबो और बट्टिकलोआ में हुए कुल आठ धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि 500 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। मरने वाले वालों में महिलाएं, बच्चे और 11 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। 2009 में लिट्टे के खात्मे के बाद श्रीलंका के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा हमला था।
हांगकांग में प्रदर्शन – हांगकांग में लोकतंत्र की मांग को लेकर सालभर से चल रहे प्रदर्शन अब भी थमे नहीं हैं। 2019 में इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बनाई। इन्हें कुचलने के लिए चीन ने अपनी सेना भी तैनात कर दी। पिछले 6 महीने से जारी प्रदर्शन के खिलाफ पहली बार पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिक सड़कों पर दिखे। विरोध प्रदर्शन की असली वजह थी चीनी प्रत्यर्पण बिल। इसे लेकर आंदोलन ने इस कदर जोर पकड़ा कि जनता सड़कों पर उतर आई।
ट्रंप पर महाभियोग – इस साल की एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय घटना रही अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग। 19 दिसंबर को अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग को मंज़ूरी दे दी। अमेरिकी इतिहास में ट्रंप ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिनके खिलाफ महाभियोग को मंजूरी दी गई। डेमोक्रेट सांसदों के बहुमत वाले अमेरिकी संसद के निचले सदन ने 197 के मुक़ाबले 230 मतों से महाभियोग को मंजूरी दे दी। अब ये मामला संसद के ऊपरी सदन सीनेट में जाएगा, हालांकि यहां रिपब्लिकन सांसद बहुमत में हैं। ऐसे में इस बात की संभावना बहुत कम है कि राष्ट्रपति ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकेगा।
बगदादी हुआ ढेर – 28 अक्तूबर 2019 को आईएस सरगना अबु बकर अल बगदादी को अमेरिका ने ढेर कर दिया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके अगले दिन दावा किया कि आईएस सरगना अबु बकर अल बगदादी को ढेर करने के बाद उसके उत्तराधिकारी को भी ढेर कर दिया गया है। 29 अक्तूबर को ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि पिछली रात अमेरिका दुनिया के नंबर एक आतंकी को इंसाफ के दायरे में लाया गया। अबु बकर अल-बगदादी मारा गया है। बगदादी दुनिया के सबसे खूंखार और हिंसक संगठन का संस्थापक और सरगना था। ट्रंप ने कहा कि बगदादी के साथ उसके तीन बच्चे और कई सहयोगी भी मारे गए। ट्रंप ने बताया कि बगदादी सीरिया की एक सुरंग में छिपा हुआ था। उन्होंने कहा कि घिर जाने के बाद बगदादी ने खुद को बच्चों सहित उड़ा लिया।
मुशर्रफ को फांसी की सजा – साल 2019 पाकिस्तान के लिए भी उथलपुथल भरा रहा। इमरान खान की अगुवाई में ये देश आर्थिक संकट से जूझता रहा। भारत के साथ उसके रिश्ते लगातार बिगड़ते रहे। इसी दौरान 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आर्मी चीफ व तानाशाह परवेज मुशर्रफ को मौत की सजा का एलान किया। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व राष्ट्रपति को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। इस्लामाबाद की विशेष अदालत ने मंगलवार को पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ को राजद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई है। उन्हें यह सजा नवंबर 2007 में संविधान से इतर आपातकाल लागू करने की वजह से सुनाई गई है। उन्होंने देश में आपातकाल लागू करने के बाद मार्शल लॉ लगा दिया था। पूर्व सेनाध्यक्ष इस समय दुबई में हैं। उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दिसंबर 2013 से लंबित था।

अजय झा

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