जनरल बिपिन रावत बने देश के पहले सीडीएस, तीनों सेनाओं को करेंगे नियंत्रित

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सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाया गया है। केंद्र सरकार ने रविवार को ही सीडीएस के पद के लिए उम्र की सीमा बढ़ाई है। अब सीडीएस के रिटायर होने की उम्र 65 वर्ष होगी। जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को सेनाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके स्थान पर मनोज मुकुंद नरवाणे नए सेनाध्यक्ष का पद संभालेंगे।
सीडीएस प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री का प्रमुख सैन्य सलाहकार होंगे, जो तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बनाएंगे। भविष्य के युद्ध कई मोर्चों पर लड़े जाएंगे। सीडीएस यह सुनिश्चित करेंगे कि हमें सही हथियार और उपकरण मिलें। हालांकि सैन्य सेवाओं से जुड़े विशेष मामलों में तीनों सेनाओं के चीफ पहले की तरह रक्षामंत्री को सलाह देते रहेंगे। गौरतलब है कि 1999 के कारगिल युद्ध के बाद से सुरक्षा विशेषज्ञ इसकी मांग करते रहे हैं। कारगिल के बाद तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में बने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने भी तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए सीडीएस की सिफारिश की थी। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने अपनी सिफारिश में कहा था अगर कारगिल युद्ध के दौरान ऐसी कोई व्यवस्था होती और तीनों सेनाएं बेहतर तालमेल से युद्ध के मैदान में उतरतीं तो नुकसान काफी कम होता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को घोषणा की थी कि भारत में तीनों सेना के प्रमुख के रूप में सीडीएस होगा। अधिकारियों ने बताया कि सीडीएस अन्य सेना प्रमुखों के समान ही होंगे। हालांकि, प्रोटोकाल की सूची में सीडीएस, सेना प्रमुखों से ऊपर होंगे। हालांकि 20 साल बाद इसे लागू किया गया है।

पहला सीडीएस अपना कार्यभार संभालने के तीन वर्षों के अंदर तीनों सेनाओं के अंदर ऑपरेशन, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, ट्रेनिंग, सपॉर्ट सर्विस, कम्यूनिकेशन, रिपेयर्स के बीच तालमेल बनाए रखने का काम करेगा। सीडीएस मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर का समुचित उपयोग सुनिश्चित करेगा और इसे रैशनलाइज भी करेगा। सीडीएस की जिम्मेदारी स्वदेशी औजारों की हिस्सेदारी बढ़ाना भी है। सीडीएस कार्यकाल को त्यागने के बाद किसी भी सरकारी कार्यालय में काम करने के लिए पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा वह सीडीएस के पद से हटने के बाद पांच साल तक पूर्व स्वीकृति के बिना कोई निजी रोजगार भी नहीं कर सकेंगे।

बता दें कि अमेरिका, चीन, यूनाइटेड किंगडम, जापान सहित दुनिया के कई देशों के पास चीफ ऑफ डिफेंस जैसी व्यवस्था है। बताया जा रहा है कि विस्तृत भूमि, लंबी सीमाओं, तटरेखाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों को ध्यान में रखा गया। भारत के पास दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना है, लेकिन इसके साथ ही हम सबसे कम संयुक्त सेना में से भी हैं।इसलिए देश को चीफ ऑफ डिफेंस पद की बहुत जरूरत थी।

अजय झा

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