हेमंत सोरेन बने झारखंड के 11वें मुख्यमंत्री, समारोह में दिखी विपक्षी एकता

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झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन ने झारखंड के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। मंत्रिमंडल के सहयोगी के रूप में कांग्रेस के दो और राष्ट्रीय जनता दल का एक विधायक ने भी शपथ ली। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने भी मंत्री पद की शपथ ली। साथ ही राष्ट्रीय जनता दल के विधायक सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद का शपथ ली। समारोह के दौरान सोरेन को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। नई सरकार के शपथ समारोह में राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोह गहलोत, कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह, डीएमके प्रमुख स्टालिन, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, वामपंथी नेता डी राजा, सीताराम येचुरी, आप सांसद संजय सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद यादव, झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी, मधु कोड़ा और शिबू सोरेन मौजूद रहे। वहीं असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भी समारोह में शामिल हुए।

बता दें कि हेमंत सोरेन दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। इससे पहले हेमंत ने जुलाई 2013 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। जेएमएम-राजद-कांग्रेस के साथ मिलकर उन्होंने 1 साल 5 महीने 15 दिनों तक सरकार चलाई थी। हेमंत के पिता शिबु सोरेन भी 3 बार राज्य के सीएम रहे हैं। तीनों कार्यकालों में वह सिर्फ 10 महीने 5 दिन ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे, जो हेमंत के एक कार्यकाल से काफी कम है।वहीं डिप्टी सीएम, स्पीकर और मंत्री पदों को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच शनिवार देर रात तक माथापच्ची होती रही। इस कारण मंत्रिमंडल का स्वरूप तय नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस स्पीकर के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री का पद भी मांग रही है, जिस पर झामुमो तैयार नहीं है। अब 30 दिसंबर को दिल्ली में बुलाई गई एक बैठक में मंत्रियों के नाम पर गठबंधन के नेताओं में सहमति बन सकती है।

कई वरिष्ठ नेताओं ने इस कार्यक्रम से किया किनारा
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रांची नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं शपथ ग्रहण को विपक्षी एकजुटता का बड़ा केन्द्र बनाने के प्रयास में जुटी कांग्रेस और झामुमो को उस समय बड़ा झटका लगा जब बसपा सुप्रीमो मायावती के भी रांची का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

अजय झा

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