राज्यसभा से भी नागरिकता संशोधन बिल पास,अब राष्ट्रपति के मुहर का इंतजार

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11 दिसंबर, 2019 का दिन भारत के इतिहास में दर्ज हो गया है। लोकसभा के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक बुधवार को राज्यसभा में भी पारित हो गया। विधेयक के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े। वहीं शिवसेना के तीनों सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और सदन से वॉकआउट किया। राज्यसभा में इस पर करीब 8 घंटे तक बिल पर बहस चली। गृहमंत्री अमित शाह ने दोपहर को उच्च सदन में यह बिल पेश किया था। लोकसभा में इस बिल को सोमवार को ही मंजूरी मिल चुकी है। निचले सदन में विधेयक पर 14 घंटे तक बहस के बाद रात 12.04 बजे वोटिंग हुई थी। बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े थे। इस विधेयक के पास होने के साथ ही पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस विधेयक में दूसरे देशों में रहने वाले हिंदू, जैन, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध समेत छह धर्मों के नागरिकों को शामिल किया गया है। दोनों सदनों से पास होने के बाद अब विधेयक को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति इस पर अपनी सहमति दे भी सकते हैं, या नहीं भी दे सकते हैं। वे विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा भी सकते हैं। अगर विधेयक को राष्ट्रपति के किए गए संशोधनों के साथ या इनके बिना, दोनों सदनों में फिर से पास कर दिया जाता है, तो वे अपनी सहमति देने से मना नहीं कर सकते। विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।

राज्यसभा में नागरिकता बिल पर बहस का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- यह बिल किसी की नागरिकता नहीं छीन रहा है। अमित शाह ने कांग्रेस से कहा मेहरबानी करके राजनीति करिए, लेकिन ऐसा करके देश में भेद नहीं खड़ा करना चाहिए। ये संवेदनशील मामले होते हैं और ये जो आग लगती है अपने ही घर को जलाती है। उन्होंने कहा कि कल जो पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने कहा था, आज यहां बोला गया। कांग्रेस और पाकिस्तान के बयान में अंतर नहीं है। सर्जिकल स्ट्राइक और 370 पर दोनों के बयान एक जैसे हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370, तीन तलाक एंटी मुस्लिम बिल नहीं हैं। क्या महिलाओं के अधिकार नहीं हैं। कश्मीर में अब शांति है। साथ ही हम मानते हैं कि ये बिल मुस्लिम विरोधी नहीं है।
राज्यसभा में बिल के पक्ष में भाजपा- 83, अन्ना द्रमुक-11, बीजेडी-7, जेडीयू-6, नामित- 4, अकाली दल- 3, आजाद और अन्य- 11 सांसदों ने बिल को समर्थन दिया।
राज्यसभा में बिल के विपक्ष में – कांग्रेस-46, टीएमसी-13, सपा-9, वामदल-6, डीएमके-5, टीआरएस-6, बसपा-4 ने बिल के विरोध में वोटिंग की। अन्य-21 में से भी 16 सांसदों ने बिल के विरोध में वोटिंग की।

अजय झा

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