नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा से पास

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लोकसभा में सोमवार को भारी शोर-शराबे के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 पारित हो गया। हालांकि, विधेयक पेश करने से पहले सदन में करीब एक घंटे तक तीखी नोकझोंक हुई। रात 12.04 बजे हुई वोटिंग में बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। इस पर करीब 14 घंटे तक बहस हुई। विपक्षी दलों ने बिल को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा कि यह बिल यातनाओं से मुक्ति का दस्तावेज है और भारतीय मुस्लिमों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। शाह ने कहा कि यह बिल केवल 3 देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यकों के लिए है और इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं, क्योंकि वहां का राष्ट्रीय धर्म ही इस्लाम है। अब यह बिल राज्यसभा में जाएगा। भाजपा ने इसे लेकर अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। विधेयक पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के मुस्लिमों से भेदभाव के आरोपों पर उसके शासनकाल की याद दिलाई। शाह ने कहा, 1971 में इंदिरा गांधी ने निर्णय किया था कि बांग्लादेश से जितने लोग आए हैं, सारे लोगों को नागरिकता दी जाए, तो फिर पाकिस्तान से आए लोगों को क्यों नहीं दी गई? उन्होंने सवाल किया कि जब अनुच्छेद 14 ही था तो फिर बांग्लादेश ही क्यों? उन्होंने कहा, वहां नरसंहार रुका नहीं है। वहां आज भी अल्पसंख्यकों को चुन-चुन कर मारा जा रहा है। उसके बाद युगांडा से आए लोगों को कांग्रेस के शासन में नागरिकता दी गई। तब इंग्लैंड से आए लोगों को क्यों नहीं दी गई? फिर दंडकारण्य कानून लाकर नागरिकता दी गई। उसके बाद राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड किया। उसमें भी 1971 का ही कट ऑफ डेट रखा तो क्या समानता हो पाई। हर बार तार्किक वर्गीकरण के आधार पर ही नागरिकता दी जाती रही है। अमित शाह ने सवाल किया, अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकार कैसे होंगे, बताएं। समानता का कानून कहां चला जाता है? अल्पसंख्यकों को अपना शैक्षणिक संस्थान चलाने का अधिकार क्या समानता के कानून के खिलाफ है क्या? उन्होंने कहा कि 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ। गृहमंत्री ने कहा, इसमें भारत-पाकिस्तान ने अपने यहां अल्पसंख्यकों के संरक्षण का संकल्प लिया। भारत में तो इसका गंभीरता से पालन हुआ, लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हुए जोर-जुल्म से दुनिया अवगत है। तीनों राष्ट्रों में हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख और ईसाई इन सभी धर्मावलंबियों के खिलाफ धार्मिक प्रताड़ना हुई। अब नए बिल के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी शरणार्थियों को नागरिकता मिलने में आसानी होगी। इसके अलावा अब भारत की नागरिकता पाने के लिए 11 साल नहीं बल्कि छह साल तक देश में रहना अनिवार्य होगा।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि मैं नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 के सभी पहलुओं को साफ तौर पर समझाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से सराहना करता हूं।
ये दल विरोध में
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, सपा, बसपा, राजद, माकपा, एआईएमआईएम, बीजद और असम में भाजपा की सहयोगी अगप विधेयक का विरोध कर रही हैं।
ये दल समर्थन में
अकाली दल, जदयू, अन्नाद्रमुक और शिवसेना इस विधेयक पर सरकार के साथ हैं।
सदन में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने संविधान की प्रस्तावना और नागरिकों को प्रदत्त मूल अधिकारों का हवाला देते हुए नागरिकता संशोधन विधेयक को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार को नजरअंदाज कर रही है। यह हमारे लोकतंत्र का ढांचा है। अधीर के हंगामे पर शाह ने तंज कसा कि अधीर जी इतने अधीर मत होइए। वहीं चर्चा के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गृहमंत्री अमित शाह की तुलना एक कुख्यात तानाशाह से की। उन्होंने कहा कि अगर यह बिल पास हुआ तो गृह मंत्री की कुख्यात तानाशाह से तुलना होगी। सत्ता पक्ष के भारी विरोध के बाद स्पीकर ओम बिरला ने ओवैसी की टिप्पणी को कार्यवाही से हटाया।
राज्यसभा में संख्याबल का गणित – राज्यसभा में फिलहाल सदस्यों की कुल संख्या 239 है। मतलब ये कि अगर सदन के सभी सदस्य मतदान करें तो बहुमत के लिए 120 वोट की जरूरत पड़ेगी। अगर एनडीए के साथ उन दलों की बात करें जो एनडीए का सहयोग कर सकते हैं तो उनकी संभावित संख्या 114 बनती है. इनमें बीजेपी के 83, बीजेडी के 7, एआइएडीएमके के 11 और अकाली दल के 3 सदस्य शामिल हैं।नागरिकता संशोधन विधेयक पर विपक्ष का जिस तरह से रुख है, ऐसे में सरकार को राज्यसभा में कड़ी चुनौती मिल सकती है। कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, सपा के 9, सीपीएम और डीएमके के 5-5 और आरजेडी, एनसीपी और बसपा के 4-4 सदस्यों समेत बाकी दलों को मिलाकर विपक्ष के पास कुल 108 सांसदों का समर्थन हासिल है।

अजय झा

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