अयोध्या ही नहीं, इन बड़े फैसलों के लिए भी याद किए जाएंगे CJI रंजन गोगोई

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई आज, 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 15 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्य का आखिरी दिन था। सीजेआई गोगोई ने 3 अक्तूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में 23 अप्रैल 2012 को नियुक्त हुए थे। तब से अब तक जस्टिस रंजन गोगोई ने अयोध्या मामले समेत कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए हैं, जिसके लिए देश उन्हें हमेशा याद करेगा। वे कड़े और कई बार आश्चर्यचकित कर देने वाले फैसले लेने के लिए भी जाने जाते हैं।


अयोध्या मामला
सीजेआई रंजन गोगोई के करियर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला अयोध्या मामले में रहा। उनकी अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन के उस मामले पर अंतिम फैसला सुनाया जो सैकड़ों सालों से चला आ रहा था। यह फैसला 9 नवंबर 2019 को आया।
आरटीआई दायरे में सीजेआई कार्यालय
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय अब सूचना का अधिकार कानून (RTI Act) के दायरे में आएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार, 13 नवंबर 2019 को ये फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय है, इसलिए यह आरटीआई कानून के दायरे में आएगा। यह बड़ा फैसला भी सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनाया। यह मामला भी करीब नौ साल तक चला।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने के मामले में भी पूरे देश में कई विवाद हुए। लेकिन सीजेआई गोगोई का फैसला अडिग रहा। उन्होंने निश्चित किया कि तय समयसीमा में एनआरसी को लागू किया जा सके, ताकि गैरकानूनी तरीके से असम में रह रहे लोगों की पहचान की जा सके। गोगोई का जन्म असम के डिब्रूगढ़ में ही हुआ है।


राफेल मामला
14 नवंबर 2019 जब सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने भारतीय वायुसेना के लिए भारत और फ्रांस के बीच हुए लड़ाकू विमान राफेल के सौदे पर फैसला सुनाया। कुछ मंत्रियों, सांसदों व वरिष्ठ वकीलों ने इस सौदे को चुनौती देते हुए पुनर्विचार के लिए याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने याचिकाएं खारिज करते हुए साफ कहा कि इस मामले में अलग से जांच की कोई जरूरत नहीं है।

आपको बता दें की चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने देश के सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा बनाए रखने के लिए भी आवाज उठाई। 12 जनवरी 2018 में तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्य प्रणाली से नाराज गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट के जज एकसाथ न्यायालय के आंतरिक मामलों को लेकर मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से आए थे।

अजय झा

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