अयोध्या मसले पर फैसले का इंतजार

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अयोध्या में विवादित स्थल के संबंध में इसी महीने आने वाले कोर्ट के फैसले के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने सभी कार्यक्रम 20 नवंबर तक स्थगित कर दिए हैं। साथ ही स्वयंसेवकों की एक टीम बनाने का फैसला लिया है, जो 7 से 17 नवंबर तक जनता के सभी वर्गों के बीच जाएगी और उनसे शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। अयोध्या मामले पर फैसले की तारीख नजदीक आने के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने संगठनों से संबंधित लोगों को काबू में रखने के साथ हिंदू समाज की तरफ से भी कुछ ऐसा न होने देने के लिए कमर कस ली है जिससे माहौल बिगड़ जाए। पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं की इस मुद्दे पर बयानबाजी और सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर टिप्पणियां डालने पर रोक लगाने के बाद संघ ने अपने संगठनों की सद्भाव समितियों के जरिये हिंदू समाज तथा सामान्य कार्यकर्ताओं से भी संपर्क व संवाद शुरू कर दिया है। जो उनसे हर परिस्थिति में शांति और धैर्य से रहने का आग्रह कर रहे हैं।

वहीं अयोध्या पर आनेवाले फैसले से पहले अंबेडकर नगर के अलग-अलग कॉलेजों में 8 अस्थाई जेल बनाई गई है। प्रशासन ने ऐसा फैसला सुरक्षा के मद्देनजर लिया है। अयोध्या में पहले से हाई अलर्ट है और जगह-जगह जवानों की तैनाती की गई है। प्रशासन हर परिस्थिति से निपटने के लिए सुरक्षात्मक मोड में हैं। संवेदनशील मामला होने की वजह से एहतियातन ऐसा किया गया है। पुलिस विभाग अपने वाहनों की भी मरम्मत और सर्विस करा रहा है, जिससे आपातकाल में कोई समस्या ना आ जाए। पुलिस प्रशासन अफवाहों और गलत जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी व्यापक स्तर पर निगरानी रखे हुए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखने को कहा है। इसके साथ ही अर्धसैनिक बल के 4,000 जवानों को एहतियातन उत्तर प्रदेश भेजा गया है। दूसरी ओर, आरपीएफ ने भी अपने सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर 78 महत्वपूर्ण स्टेशनों की सुरक्षा-व्यवस्था का अलर्ट जारी किया है।

आपको बता दें की अयोध्या मामले में आने वाले फैसले को देखते हुए कई आयोजनों में बदलाव हो सकता है। 15 और 16 नवंबर को होने वाला भाजपा के जिलाध्यक्षों का चुनाव आगे बढ़ सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के कानपुर आगमन के कार्यक्रम में भी फेरबदल संभव है। जिला प्रशासन के अनुसार पीएम और राष्ट्रपति के आगमन का प्रोटोकाल 15 से 20 दिन पहले आ जाता है। माना जा रहा है कि अयोध्या मसले को देखते हुए अभी नहीं भेजा जा रहा है।

अजय झा

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