बिहार में शराबबंदी कानून पर हाईकोर्ट का तीखा सवाल- 2 लाख केस कैसे निपटाएंगे,राज्य सरकार दें जवाब

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पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से बड़ा सवाल किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद राज्य की अदालतों में दो लाख से भी अधिक शराबबंदी के मामले पेंडिग हैं। जस्टिस सुधीर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि इतनी बड़ी संख्या इन मुकदमों का कैसे निबटारा होगा?कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में शराबबन्दी संबंधी मामलों की सुनवाई व निपटारे के लिए युध्द स्तर पर कार्रवाई करने की जरूरत है। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि शराबबंदी के मामले में मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जजों की संख्या और अन्य सुबिधायें आज भी काफी कम हैं। बता दें कि देशभर के न्यायालयों में पहले से ही काम का अत्यधिक दबाव है, ऊपर से शराबबंदी कानून ने बिहार में न्यायपालिका पर काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया है। इस मामले पर सुनवाई के लिए कोर्ट में अगली तिथि 24 अक्टूबर तय की है।

शराबबंदी से जुड़े सबसे ज्यादा मामले पटना में लंबित हैं। पटना में कुल 28593 मामले लंबित है, अबतक केवल 11 मामलों का निपटारा किया जा सका है। लंबित मामलों की सूची में गया दूसरे स्थान पर है जहां 11211 केस लंबित हैं। मोतिहारी में 9979, कटिहार में 8667, सासाराम में 8167, बेतिया में 7881, छपरा में 7344, समस्तीपुर में 6978, मुजफ्फरपुर में 6834, नवादा में 6774, मधुबनी में 6651 शराबबंदी से जुड़े मामले लंबित हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि 24 अक्टूबर को हाईकोर्ट जब इस मामले की सुनवाई करेगा तो बिहार सरकार की तरफ से क्या जवाब दिया जाता है।

अजय झा

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