स्विस बैंक में जमा ब्लैकमनी का सितंबर में होगा पर्दाफाश

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स्विट्जरलैंड के बैंकों में अघोषित खाते रखने वाले भारतीयों के खिलाफ दोनों देशों की सरकारों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। स्विस बैंक में भारतीयों के खातों की जानकारी 30 सितंबर से पहले मिल जाएगी। दोनों देश बैंकिंग से संबंधित जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे।बता दें कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुआ समझौता जनवरी 2018 से प्रभावी हो गया है। दोनों देशों ने ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (AEOI) समझौते पर हस्ताक्षर किए है। भारत समेत 73 देशों के साथ स्विट्जरलैंड का AEOI समझौता हुआ है। इसीलिए अब वह उन बैंक खातों की जानकारी इस साल शेयर करेगा। स्विस बैंकों में धन जमा करने वाले देशों की सूची में भारत 74वें स्थान पर है, जबकि ब्रिटेन शीर्ष पर। पिछले साल इस सूची में भारत 15 पायदान की छलांग लगाकर 88वें स्थान से 73वें नंबर पर रहा था। स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) द्वारा जारी वार्षिक बैंकिंग आंकड़ों का विश्लेषण के मुताबिक, जब बात भारतीय नागरिकों और उपक्रमों द्वारा स्विस बैंकों में जमा कुल धन की आती है तो इस सूची में भारत काफी पीछे नजर आता है। स्विस बैंकों में विदेशियों द्वारा जमा धन का महज 0.07 फीसदी धन भारतीयों का है। बताते चलें कि भारत 1996 से लेकर 2007 तक इस सूची में शीर्ष 50 में शामिल था। साल 2004 में भारत को 34वां स्थान दिया गया था, जो उसकी सर्वोच्च रैंकिंग थी। हालांकि 2008 के बाद से उसकी रैंकिंग गिरने लगी। भारतीय ग्राहकों का पैसा 2018 में लगभग छह फीसदी गिरकर 955 मिलियन स्विस फ्रैंक (लगभग 6,757 करोड़ रुपये) हो गया, जो दो दशकों में इसका दूसरा सबसे निचला स्तर था। अब देखना दिलचस्प होगा की भारत के धन कुबेरों में कितने राजनेता, अभिनेता सहित बिज़नेस टायकून का नाम स्विस बैंकों द्वारा जारी किया जाता है।

अजय झा

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