क्या आप जानते हैं कि आपके सांसद कितने बड़े अपराधी,धनकुबेर और शिक्षित हैं ?

14204
0
SHARE

देश में अब 17वीं लोकसभा के चुनाव संपन्न हो गए हैं लेकिन ये जानना भी जरूरी है कि सत्ता की गद्दी पर बैठने को तैयार इन नेताओं में से कितने नेता अपराधों में फंसे हैं और कौन कितना करोड़पति है।एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक अलायंस (एडीआर) ने नवनिर्वाचित 542 सांसदों में 539 सांसदों के हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर बताया कि इनमें से 159 सांसदों (29%) के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। इसी मामले पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी शोध संस्था एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, आपराधिक मामलों में फंसे सांसदों की संख्या दस साल में 44 प्रतिशत बढ़ गई है। पिछले तीन लोकसभा चुनाव में निर्वाचित होकर आने वाले सांसदों में करोड़पति और आपराधिक मामलों में घिरे सदस्यों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।बीजेपी के 303 में से 301 सांसदों के हलफनामे के विश्लेषण में पाया गया कि साध्वी प्रज्ञा सिंह सहित 116 सांसदों (39%) के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के 52 में से 29 सांसद (57%) आपराधिक मामलों में घिरे हैं। वहीं, करोड़पति सांसदों की संख्या 2009 में 58 प्रतिशत थी जो 2019 में 88 प्रतिशत हो गई है। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 17वीं लोकसभा के लिए चुनकर आए 542 सांसदों में से 233 (43%) सांसदों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं। इनमें से 159 (29 फीसद) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय 25 राजनीतिक दलों में 6 दलों के सौ फीसद सदस्यों ने उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। रिपोर्ट में नए चुने गए सांसदों के आपराधिक रिकॉर्ड के राज्यवार विश्लेषण से पता चलता है कि आपराधिक मामलों में फंसे सर्वाधिक सांसद बिहार और केरल से चुन कर आए हैं। केरल से निर्वाचित 90% और बिहार के 82% सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल से 55 %, उत्तर प्रदेश से 56 और महाराष्ट्र से 58% नए चुने गए सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। वहीं सबसे कम 9 फीसदी सांसद छत्तीसगढ़ के और 15 फीसदी गुजरात के हैं। एनडीए की सहयोगी पार्टी लोजपा के निर्वाचित सभी 6 सदस्यों ने अपने हलफनामे में उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित होने की जानकारी दी है। पिछली 3 लोकसभा में आपराधिक मुकदमों से घिरे सांसदों की संख्या में 44% का इजाफा दर्ज हुआ है। नए सदस्यों में 194 (36%) की उम्र 25 से 50 साल है। वहीं 343 (64%) सदस्य 51 से 80 साल की उम्र के हैं। बात करें अगर इनके शैक्षणिक योग्यता की तो 128 (24%) ऐसे सदस्य हैं जो सिर्फ 12वीं तक पढ़े हैं, जबकि 392 (73%) सदस्य स्नातक हैं। एक सदस्य ने खुद को महज साक्षर तो एक अन्य ने खुद को निरक्षर बताया है। अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है की जब ऐसे आपराधिक छवि वाले, निरक्षर और साक्षर सांसद पार्लियामेंट में बैठकर आपके लिए भविष्य की योजनाओं पर मुहर लगाएंगे तो अपने संसदीय क्षेत्र और देश का कितना भला कर पाएंगे?

अजय झा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here