पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का निधन

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भारतीय राजनीति के महारथियों में से एक समाजवादी नेता और देश के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस नहीं रहे। पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का आज सुबह निधन हो गया। 88 साल के जॉर्ज ने सात बजे अंतिम सांस ली बताया जाता है कि स्वाइन फ्लू के कारण उनकी मौत हो गई। वे लंबे समय से बीमार थे। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

 9 बार लोकसभा सांसद रहे जॉर्ज फर्नांडिस समता पार्टी के संस्थापक थे और केंद्र सरकार में उद्योग, रेल और रक्षा समेत विभिन्न मंत्रालयों का पद संभाला जॉर्ज प्रखर समाजवादी नेता थे. वे अटल सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर से पांच बार और नालंदा से सांसद रह चुके हैं। वे काफी लंबे समय से भूलने की बीमारी से ग्रसित थे। 

जॉर्ज फर्नांडिस का जीवन परिचय –

जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म मैंगलोर में 3 जून 1930 को हुआ था. वे 10 भाषाओं के जानकार थे. मंगलौर में पले-बढ़े फर्नांडिस जब 16 साल के हुए तो एक क्रिश्चियन मिशनरी में पादरी बनने की शिक्षा लेने भेजे गए।  पर चर्च में पाखंड देखकर उनका उससे मोहभंग हो गया । उन्होंने 18 साल की उम्र में चर्च छोड़ दिया और रोजगार की तलाश में बंबई चले आए।

जॉर्ज  साहब ने एक बार बताया था कि इस दौरान वे चौपाटी की बेंच पर सोया करते थे और लगातार सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन आंदोलन के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे।   फर्नांडिस की शुरुआती छवि एक जबरदस्त विद्रोही की थी।  उस वक्त मुखर वक्ता राम मनोहर लोहिया, फर्नांडिस की प्रेरणा थे।  बिखरे बाल और पतले चेहरे वाले फर्नांडिस, तुड़े-मुड़े खादी के कुर्ते-पायजामे, घिसी हुई चप्पलों और चश्मे में खांटी एक्टिविस्ट लगा करते थे। 

राजनीतिक सफर –

 उन्होंने 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाने का विरोध किया। कहा जाता है कि आपातकाल की घोषणा के बाद जॉर्ज फर्नांडिस ने डायनामाइट लगाकर देश में विस्फोट करने का ऐलान किया था। देश में हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप में जॉर्ज और उनके साथियों को 1976 में गिरफ्तार किया गया।  और सीबीआई ने जॉर्ज समेत उनके 25 साथियों पर मुकदमा दर्ज किय।  इसके लिए विस्फोटक गुजरात के बड़ौदा से आए थे, इसलिए इस कांड को बड़ौदा डायनामाइट केस के नाम से जाना गया।  1977 में इंदिरा गांधी द्वारा चुनावों की घोषणा के साथ आपातकाल समाप्त हुआ. जॉर्ज फर्नांडिस ने जेल में रहते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड मत से जीते। फिर उसके बाद पीछे मुर के कभी नहीं देखे। रक्षा मंत्री रहते हुए भी उनके हिस्से कई बड़ी सफलता आई। पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण और कारगिल में विजय उनके कार्यकाल में ही हुए। 26 जुलाई, 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी।  करीब दो महीने तक चला कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर देशवासी को गर्व होता है। 

 1998 से 2004  तक उन्होंने रक्षामंत्री के तौर पर देश की सेवा की।  ताबूत घोटाला और तहलका स्टिंग मामले में उनका नाम आया लेकिन बाद में उन्हें कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई।  जॉर्ज फर्नांडिस भारत के एकमात्र रक्षामंत्री हैं, जिन्होंने 6,600 मीटर ऊंचे सियाचिन ग्लेशियर का 18 बार दौरा किया था। 

 जिस मुजफ्फरपुर से जेल में रहते जॉर्ज चुनाव जीते, वहीं राजनीतिक सफर का त्रासदीपूर्ण अंत भी  हुआ। कहा जाता है कि जॉर्ज ने अनेकों लोगों को राजनीति में मौका दिया।  अपनी पार्टी में तो लोग उन्हें चाहते ही थे, विरोधी भी उनके कायल थे।  मगर किसको पता था कि एक दिन अपने ही लोग जॉर्ज से इस कदर बेगाने हो जाएंगे कि उन्हें लोकसभा के टिकट के लिए अपने बनाए और तैयार किए हुए नेताओं का मोहताज होना पड़ा।  2009 में भी वह जनता दल (युनाइटेड) के टिकट पर मुजफ्फरपुर से चुनाव लरना चाहते थे लेकिन जदयू ने मौका नहीं दिया। मजबूरन उन्होंने अपनी ही पार्टी से बगावत कर दी और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मुजफ्फरपुर से मैदान में कूद पड़े। और अपने राजनीतिक जीवन का अंतिम चुनाव हार गए। 

जॉर्ज  के निधन से शोक की लहर –

 जार्ज के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शोक व्यक्त किया। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शोक व्यक्त किया।  उन्होंने कहा कि उनके जाने से देश को अपूर्णीय क्षति हुई है। वही राजद सुप्रीमो लालू यादव, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, पूर्व सीएम राबड़ी देवी, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी, शरद यादव, शिवानंद तिवारी, कांग्रेस नेता मदन मोहन झा, जदयू प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा सहित तमाम नेताओं ने शोक जताया है।

अजय झा

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